सतकुंभा उत्सव 2026: धार्मिक आस्था, भक्ति संस्कृति का जीवंत उदाहण
सतकुंभा उत्सव: धार्मिक आस्था, भक्ति संस्कृति का जीवंत उदाहण
- तीर्थ में रुद्र महायज्ञ पूर्ण आहुति के साथ सात दिवसीय सतकुंभा उत्सव संपन्न
- शिव-पार्वती विवाह पर राजेश स्वरूप महाराज ने दिया दिव्य संदेश
सोनीपत, अजीत कुमार। गन्नौर के सिद्धपीठ सतकुंभा तीर्थ में रविवार को सात दिवसीय रुद्र महायज्ञ की पूर्ण आहुति के साथ सतकुंभा उत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह उत्सव धार्मिक आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक रहा। हजारों श्रद्धालु जुटे, जहां हजारों वर्ष पुराने प्राचीन शिव मंदिर में विधिवत जलाभिषेक किया गया। यह तीर्थ सप्तऋषियों से जुड़ा माना जाता है और भारत के प्रमुख 68 तीर्थों में शामिल है। खेड़ी गुज्जर स्थित इस धाम में गुर्जर-प्रतिहार काल के पुरातात्विक अवशेष भी मिलते हैं। पीठाधीश्वर महंत राजेश स्वरूप महाराज के मार्गदर्शन में तीर्थ का निरंतर जीर्णोद्धार और विकास कार्य चल रहा है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर पीठाधीश्वर श्री महंत राजेश स्वरूप महाराज ने शिव-पार्वती विवाह के दिव्य रहस्य पर गहन प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि शिव और पार्वती का मिलन केवल वैवाहिक संस्कार नहीं, बल्कि परमात्मा और प्रकृति का अद्भुत संयोग है। शिव तप, त्याग और वैराग्य के प्रतीक हैं, जबकि पार्वती साधना, भक्ति और मातृत्व की मूर्ति। उनका विवाह सिखाता है कि सच्चा प्रेम अहंकार से परे, पूर्ण समर्पण और एकता पर आधारित होता है।
महाराज जी ने संदेश दिया: जीवन में शिव की तरह निर्लिप्त रहें और पार्वती की तरह समर्पित होकर कर्तव्य निभाएं। आज के युग में टूटते परिवारों के बीच शिव-पार्वती के आदर्श अपनाकर ही सुखी गृहस्थ जीवन संभव है। ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से सिद्धि, शांति और आनंद प्राप्त होता है। भक्ति से मन पवित्र करें, समाज में प्रेम व एकता फैलाएं। उनका प्रवचन इतना प्रभावशाली रहा कि सतकुंभा परिसर भक्ति भाव से भर गया। श्रद्धालुओं ने चरणों में नमन कर संदेश को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
उत्सव में महिलाओं की कलश यात्रा विशेष आकर्षण रही। भाग लेने वाली सभी महिलाओं को महंत जी की ओर से कलश और प्रसाद प्रदान किया गया। यह यात्रा नारी शक्ति, सेवा भाव और सामूहिक भक्ति का प्रतीक बनी। संस्था की उपाध्यक्ष डॉ. कांता शर्मा ने कहा कि सतकुंभा तीर्थ साधना की ज्योति और शांति का केंद्र है। यहां की दिव्य ऊर्जा जीवन को नई दिशा देती है। कलश यात्रा ने सेवा और सद्भाव का अनुपम संदेश दिया। डॉ. शिवानी शर्मा और शिवेंदू अंशु शर्मा ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं व सहयोगियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्सव की सफलता सामूहिक प्रयास और भक्ति भाव से संभव हुई। भजन सम्राट चैन सिंह चंचल ने मधुर भक्ति गीत गाकर वातावरण को भक्ति रस में डुबो दिया, जिससे हर हृदय ईश्वर की ओर झुक गया।
जिला संपर्क प्रमुख आरएसएस सोनीपत नरेश ने कहा कि हिंदुत्व को आत्मसात करना समय की मांग है। पौराणिक संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों को जीवंत रखें। वर्तमान चुनौतियों में यही हमारी पहचान और शक्ति है। हिंदू मूल्यों को अपनाकर ही समाज-राष्ट्र मजबूत बनेगा।
उत्सव पूजा, हवन, आरती, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भरा रहा। भंडारे का प्रसाद वितरित किया गया। भंडारे सेवा में विरेंद्र धनखड़ खुबडू, दौलत राम जैन परिवार, सचिन पहल एवं साथी, आचार्य श्रीकांत रतूरी, आचार्य शिवम कौशिक, सत्यवान महाराज, सूरज शास्त्री, पंडित रममेहर, आशीष वर्मा, प्रवेश कौशिक, सोमवीर शास्त्री, आचार्य अमन, ब्रह्मपाल छौक्कर, प्रवीन सैनी, मास्टर अनिल, सहरपाल, पुष्प शर्मा, हर्षिल ढंगवाल आदि शामिल रहे। श्रद्धालुओं ने संस्था और महंत जी का धन्यवाद किया। सतकुंभा धाम अपनी प्राचीनता और दिव्य ऊर्जा से लाखों भक्तों को आकर्षित करता रहेगा। यह आयोजन धार्मिक एकता, संस्कृति संरक्षण और लोक कल्याण का उत्कृष्ट उदाहरण सिद्ध हुआ।
कैमरे की नजर में सतकुंभा उत्सव











