January 6, 2026

नववर्ष पर पावन संदेश: नववर्ष आत्मिक परिवर्तन का अवसर है, उत्सव भर नहीं: निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी

Sacred Message on New Year: New Year is an occasion for spiritual transformation, not just a celebration: Nirankari Satguru Mata Sudiksha Ji

नववर्ष आत्मिक परिवर्तन का अवसर है, उत्सव भर नहीं: निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी

नववर्ष के पावन अवसर पर निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने खुशियों, आशीष और आत्मिक जागरण से भरा संदेश देते हुए कहा कि निरंकार की रज़ा में जीवन जीना ही सच्ची साधना है। दिल्ली के निरंकारी चैक, बुराड़ी रोड स्थित ग्राउंड नंबर-8 में आयोजित विशेष सत्संग समारोह में दिल्ली-एनसीआर सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। नववर्ष के प्रथम दिन सतगुरु माता जी और निरंकारी राजपिता जी के दिव्य सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। इस अवसर पर सतगुरु माता जी ने नववर्ष को केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि जीवन में आत्मिक परिवर्तन लाने का अवसर बताया और संतों के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

Sacred Message on New Year: New Year is an occasion for spiritual transformation, not just a celebration: Nirankari Satguru Mata Sudiksha Ji
नववर्ष आत्मिक परिवर्तन का अवसर है, उत्सव भर नहीं: निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि नववर्ष का प्रथम दिवस हमें आत्ममंथन करने और संतों के वचनों को जीवन में उतारने का अवसर प्रदान करता है। संसार जहां नववर्ष की शुरुआत बाहरी उत्सव और मौज-मस्ती से करता है, वहीं संत सत्य, सेवा और सत्संग के मार्ग को अपनाते हैं। सत्संग से आरंभ हुआ जीवन निरंकार के एहसास को हर क्षण और अधिक दृढ़ करता है।

उन्होंने कहा कि नववर्ष केवल धरती के सूर्य के चारों ओर एक और परिक्रमा पूरी करने का प्रतीक है, पर वास्तविक परिवर्तन तभी सार्थक होता है जब वह भीतर से हो। आत्मिक परिवर्तन सेवा, सुमिरन और सत्संग के माध्यम से संभव है। जब भक्त निरंकार को सर्वोपरि मानकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, तब उसका जीवन स्वयं एक प्रेरणास्रोत बन जाता है।

सतगुरु माता जी ने यह भी कहा कि एक सच्चा भक्त यही कामना करता है कि प्रत्येक नया वर्ष उसे पहले से अधिक सेवा, सुमिरन और सत्संग से जोड़े। जब यह विश्वास दृढ़ हो जाता है कि कल भी दातार की रज़ा थी और आज भी उसी की कृपा है, तब चिंता स्वतः समाप्त हो जाती है और जीवन सहज, संतुलित और आनंदमय बन जाता है।

उन्होंने कहा कि नववर्ष तिथि परिवर्तन भर नहीं, बल्कि प्रेम, सौम्यता, मिठास और आपसी समझ को अपनाने का अवसर है। द्वेष और मनमुटाव से दूर रहकर दूसरों के गुणों को अपनाना ही सच्ची भक्ति है। अंत में सतगुरु माता जी ने सभी श्रद्धालुओं को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए सुख, समृद्धि और आनंदमय जीवन का आशीर्वाद प्रदान किया।

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