भारत-यूरोपियन यूनियन में 18 साल बाद ट्रेड डील: यूरोपीय कार-शराब सस्ती होंगी, व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
प्रधानमंत्री ने 27 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से मुलाकात की।
नई दिल्ली, अजीत कुमार। करीब 18 साल की लंबी और जटिल बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बना ली है। मंगलवार को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते का औपचारिक ऐलान किया गया। यह करार न केवल भारत का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता माना जा रहा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत और यूरोप की साझेदारी को एक नए युग में ले जाने वाला कदम भी है। इस एफटीए से ऑटोमोबाइल, शराब, तकनीक, रक्षा और निवेश जैसे कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
2027 से लागू होने की उम्मीद
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार भारत-EU एफटीए को वर्ष 2027 से लागू किए जाने की संभावना है। इसके लागू होते ही दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
यूरोपीय कारें होंगी सस्ती
एफटीए के तहत भारत में यूरोपीय लग्जरी कारों पर लगने वाला आयात शुल्क बड़ा घटाया जाएगा। फिलहाल BMW, मर्सिडीज जैसी कारों पर करीब 110% तक टैक्स लगता है, जिसे घटाकर लगभग 10% करने पर सहमति बनी है। इससे भारत में लग्जरी कारों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।
शराब और वाइन पर भी टैक्स में कटौती
यूरोप से आयात होने वाली शराब और वाइन पर अभी 150% तक टैरिफ लगता है। इस समझौते के बाद इसे घटाकर 20 से 30% के बीच लाने की तैयारी है। इससे भारतीय बाजार में यूरोपीय शराब सस्ती हो सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी
भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि यूरोपीय संघ दूसरी सबसे बड़ी। दोनों मिलकर वैश्विक GDP का करीब 25% और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं। ऐसे में यह एफटीए वैश्विक व्यापार संतुलन को भी प्रभावित करेगा।
शिखर सम्मेलन में क्या हुआ तय
विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने शिखर सम्मेलन की संयुक्त अध्यक्षता की। बैठक में व्यापार, तकनीक, रक्षा, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस दौरान एफटीए की संयुक्त घोषणा, सुरक्षा व रक्षा साझेदारी समझौता और मोबिलिटी सहयोग पर MoU समेत कई अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत-EU बिजनेस फोरम में निवेश पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी और उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-EU बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। भारत मंडपम में आयोजित इस मंच पर 100 से अधिक शीर्ष उद्योगपतियों और सीईओ ने निवेश, सप्लाई चेन और तकनीकी सहयोग पर विचार साझा किए।
गणतंत्र दिवस पर विशेष मेहमान
यूरोपीय परिषद और आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत के राजकीय दौरे पर आए और गणतंत्र दिवस समारोह में संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि बने। यह पहला मौका था जब EU के शीर्ष नेताओं को यह सम्मान मिला।
पीएम मोदी: एफटीए से खुलेगा नया युग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एफटीए को भारत-EU साझेदारी के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यापार, तकनीक और निवेश को नई गति देगा।
उन्होंने तीन क्षेत्रों—विश्वसनीय सप्लाई चेन, रक्षा-उन्नत तकनीक सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा—में साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
राज्यों को मिलेगा बड़ा फायदा
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इस एफटीए से करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये के निर्यात को 27 यूरोपीय देशों के बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, यूपी, राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों को इससे बड़ा लाभ हो सकता है।
वैश्विक अनिश्चितता में मजबूत साझेदारी
भारत और EU ने वैश्विक अनिश्चितता और सप्लाई चेन बाधाओं के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने निवेश संरक्षण समझौते (IPA) और भौगोलिक संकेतक (GI) पर बातचीत जल्द पूरी करने का भी फैसला किया।
सुरक्षा और रक्षा में भी नई शुरुआत
एफटीए के साथ-साथ भारत और EU ने सुरक्षा व रक्षा साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों ने रक्षा सप्लाई चेन के एकीकरण और भरोसेमंद रक्षा इकोसिस्टम विकसित करने पर सहमति जताई।
करीब दो दशक के इंतजार के बाद हुआ भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट केवल व्यापारिक करार नहीं, बल्कि साझा समृद्धि, रणनीतिक भरोसे और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बड़ा कदम है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं, उद्योगों और राज्यों—तीनों को दूरगामी लाभ मिलने की उम्मीद है।
