January 7, 2026

श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ महोत्सव: दिशा भ्रमित युवा किसी भी राष्ट्र के पतन का कारण बनता है: डॉ अनिल गोयल

Directionless youth leads to the downfall of any nation: Dr Anil Goyal

दिशा भ्रमित युवा किसी भी राष्ट्र के पतन का कारण बनता है: डॉ अनिल गोयल

पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के एजीसीआर कॉलोनी में अंतर्राष्ट्रीय महात्यागी खालसा के श्री महंत एवं महामंडलेश्वर श्री रामगोविन्द दास महात्यागी जी महाराज के सानिध्य में आयोजित आठ दिवसीय अष्टोत्तर शत परायण श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ महोत्सव के दौरान भारतीय युवाओं को अपनी संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया। अंग्रेजी नववर्ष 2026 के अवसर पर संतों और विद्वानों ने आह्वान किया कि हर धर्म और संस्कृति का सम्मान करते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को कमजोर न होने दिया जाए।

महोत्सव में महामंडलेश्वर श्री रामगोविन्द दास महात्यागी जी महाराज ने कहा कि नववर्ष का स्वागत फूहड़ता और दिखावे के बजाय भारतीय परंपरा, मर्यादा और सांस्कृतिक चेतना के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे आधुनिकता के नाम पर अपनी जड़ों से कटने के बजाय भारतीय संस्कृति को जीवन का आधार बनाएं। इस अवसर पर स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज, संगीतमय दुर्गा स्तुति के प्रसिद्ध गायक अशोक भारद्वाज, यज्ञाचार्य शशिभूषण शास्त्री (अयोध्या धाम) और आचार्य प्रद्युम्न कृष्ण ने भी अपने ओजस्वी विचारों से उपस्थित श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि सनातन संस्कृति ने सदैव विश्व शांति और मानव कल्याण का मार्ग दिखाया है। रामराज्य की अवधारणा इसी संस्कृति की आत्मा है और संत-महात्माओं के प्रयास समाज को सही दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

कृष्णा नगर के विधायक डॉ अनिल गोयल ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए युवाओं के बदलते नजरिए पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्र का युवा दिशा भ्रमित हो जाता है, उसके पतन को कोई रोक नहीं सकता। इसलिए जरूरी है कि युवा अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं और भारतीय संस्कृति व राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।

महोत्सव में मुख्य यजमान सीए रजनीश गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक गाबा, पूर्व विधायक नसीब सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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