February 22, 2026

बिहार की ज्वेलरी दुकानों में हिजाब-नकाब पर रोक: सुरक्षा को लेकर ज्वेलर्स का बड़ा फैसला, सियासत हुई तेज

Bihar jewelry stores ban hijabs and masks: Jewelers make a major security decision, sparking political debate

पटना में ज्वेलरी शॉप के गेट पर इस तरह के पोस्टर लगाए गए हैं।

बिहार। यूपी के झांसी के बाद अब बिहार में भी ज्वेलरी दुकानों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार ज्वेलर्स एसोसिएशन ने 7 जनवरी को फैसला लिया कि राज्य की सभी ज्वेलरी शॉप्स में अब हिजाब, नकाब या घूंघट पहनकर आने वाले ग्राहकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही हेलमेट और मुरेठा पहनकर आने वाले पुरुषों की एंट्री पर भी रोक लगा दी गई है। दुकानों के बाहर इस संबंध में नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं। फैसले के बाद जहां ज्वेलर्स इसे सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक दलों के बीच इसे लेकर विवाद भी शुरू हो गया है।

क्या है नया फैसला
बिहार ज्वेलर्स एसोसिएशन के निर्देश के अनुसार अब सोने-चांदी की दुकानों में मास्क, बुर्का, नकाब, हिजाब, हेलमेट और मुरेठा पहनकर प्रवेश नहीं मिलेगा। एसोसिएशन का कहना है कि यह नियम सभी ग्राहकों पर समान रूप से लागू होगा।

ज्वेलर्स का तर्क: सुरक्षा सबसे बड़ी वजह
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि हाल के महीनों में लूट और चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। कई मामलों में अपराधी चेहरे ढककर दुकान में घुसे और वारदात कर फरार हो गए। ऑल इंडिया गोल्ड एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि चेहरे ढके होने से अपराधियों की पहचान मुश्किल हो जाती है, इसलिए यह फैसला जरूरी था।

राजनीतिक विवाद भी तेज
इस फैसले पर सियासत गरमा गई है। राजद ने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर हिजाब और नकाब को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत कोई इस्लामिक देश नहीं है और यहां सुरक्षा नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।

अलग-अलग जिलों से मिली-जुली प्रतिक्रिया
गया, कटिहार, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर के कई ज्वेलर्स ने फैसले को सही ठहराया और इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बताया। उनका कहना है कि सीसीटीवी में चेहरा साफ दिखना बेहद जरूरी है।
हालांकि शिवहर और नालंदा में कुछ कारोबारियों ने फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि व्यापार में धर्म या पहनावे के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और सुरक्षा की जिम्मेदारी दुकानदारों को खुद निभानी चाहिए।

आगे क्या
फिलहाल यह फैसला लागू किया जा रहा है, लेकिन विरोध और राजनीतिक बयानबाजी के चलते आने वाले दिनों में इस पर और बहस होने के आसार हैं।

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