January 6, 2026

बांग्लादेश में चुनावी साजिश?  हिंदू नेता का नामांकन रद्द, BNP पर दबाव और अल्पसंख्यकों को हाशिये पर धकेलने के आरोप

Bangladesh election conspiracy? Hindu leader's nomination cancelled, BNP accused of pressure and marginalization of minorities

गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने खालिदा जिया की पार्टी BNP पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है।

बांग्लादेश। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। गोपालगंज-3 संसदीय सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हिंदू नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द कर दिया गया है। रिटर्निंग ऑफिसर ने शनिवार को उनका पर्चा अमान्य घोषित कर दिया। यह वही सीट है, जहां से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सांसद रही हैं और जहां 50 प्रतिशत से अधिक मतदाता हिंदू समुदाय से आते हैं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक पेशे से वकील हैं और बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) के महासचिव भी हैं। उनके नामांकन रद्द होने के बाद देश में अल्पसंख्यकों के राजनीतिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

1% हस्ताक्षर नियम बना विवाद की जड़
बांग्लादेश के चुनावी नियमों के अनुसार, किसी निर्दलीय उम्मीदवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र के कम से कम 1% मतदाताओं के हस्ताक्षर नामांकन के साथ जमा करने होते हैं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने दावा किया कि उन्होंने इस नियम का पूरी तरह पालन किया था और आवश्यक संख्या में हस्ताक्षर जमा किए थे। हालांकि बाद में कुछ मतदाताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने यह कह दिया कि उनसे जबरन या बिना जानकारी के हस्ताक्षर कराए गए थे। इसके आधार पर सभी हस्ताक्षरों को अमान्य मानते हुए नामांकन रद्द कर दिया गया।

BNP पर दबाव बनाने का आरोप
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने आरोप लगाया है कि यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उनका कहना है कि खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं पर दबाव बनाया, ताकि वे अपने हस्ताक्षर से मुकर जाएं। गोबिंद के मुताबिक, गोपालगंज-3 सीट पर हिंदू मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण BNP को यहां हार का डर था, इसलिए उन्हें चुनावी मैदान से बाहर करने की कोशिश की गई।

हिंदू बहुल सीट पर जीत का भरोसा
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने कहा कि गोपालगंज-3 में करीब 3 लाख मतदाता हैं, जिनमें लगभग 51% हिंदू हैं। इसी वजह से वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर जीत को लेकर आश्वस्त थे। उन्होंने साफ किया कि वे इस फैसले को चुनाव आयोग में चुनौती देंगे और जरूरत पड़ी तो अदालत का भी रुख करेंगे।

BJHM और हिंदुत्व की भूमिका
बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) कुल 23 संगठनों का एक गठबंधन है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा बताया जाता है। यह संगठन बांग्लादेश में 350 से अधिक वैदिक स्कूल चलाता है, जहां बच्चों को भगवद गीता और अन्य हिंदू ग्रंथों की शिक्षा दी जाती है। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक BJHM के महासचिव हैं और लंबे समय से हिंदू अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं।

एक और हिंदू उम्मीदवार का नामांकन रद्द
गोबिंद के अलावा एक और हिंदू प्रत्याशी दुलाल बिस्वास का नामांकन भी वापस कर दिया गया है। दुलाल को गोनो फोरम पार्टी ने टिकट दिया था, इसलिए उन पर 1% हस्ताक्षर का नियम लागू नहीं होता था, लेकिन दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर उनका पर्चा खारिज कर दिया गया। हालांकि वे दोबारा दस्तावेज जमा करने की तैयारी कर रहे हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और बढ़ती चिंताएं
शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों को बांग्लादेश के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अंतरिम सरकार के बाद खालिदा जिया की पार्टी BNP सबसे ताकतवर बनकर उभरी है। वहीं, बीते 15 दिनों में 4 हिंदुओं की हत्या और लगातार हो रही हिंसा ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द होना इसी चिंता को और गहरा करता है।

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