संत निरंकारी मिशन: जल संरक्षण से सृष्टि सुरक्षा का संकल्प; ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान का चौथा चरण संपन्न: निरंकारी सतगुरु
निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज।
नई दिल्ली, अजीत कुमार। जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है और मानव सभ्यता की जीवनरेखा भी। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संत निरंकारी मिशन द्वारा ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान के चौथे चरण का भव्य आयोजन किया गया। यह अभियान सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी के मार्गदर्शन में देशभर के 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 930 शहरों के 1600 से अधिक स्थानों पर संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 12 लाख स्वयंसेवकों ने भाग लिया।

सेवा और जागरूकता का अद्भुत समन्वय
संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का उद्देश्य केवल सफाई अभियान नहीं, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देना है। नदियों, तालाबों, झीलों और समुद्री तटों की स्वच्छता के माध्यम से प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को प्रोत्साहित किया गया।
भक्ति कर्मों में प्रकट हो
दिल्ली के बुराड़ी चौक ग्राउंड में आयोजित विशेष सत्संग में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि शब्दों से नहीं, कर्मों से दी जाती है। उन्होंने बाबा हरदेव सिंह जी की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग जीवन का आधार हैं। यदि भक्ति व्यवहार में न झलके, तो वह अधूरी है।
स्वास्थ्य और मानवता की दिशा में पहल
मिशन द्वारा “संत निरंकारी हेल्थ सिटी” जैसी परियोजनाएं भी विकसित की जा रही हैं, जो समाज के प्रत्येक वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास है। यह पहल करुणा और समर्पण का प्रतीक है।
समाज और प्रकृति में संतुलन
‘वननेस वन’ अभियान के तहत वृक्षारोपण और ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के माध्यम से जल संरक्षण के प्रयास मानवता और प्रकृति के मध्य सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन बनकर समाज को सेवा और जिम्मेदारी की प्रेरणा दे रहा है।
