February 22, 2026

पाकिस्तान की अफगान सीमा पर एयरस्ट्राइक: 16 मौतों का दावा; काबुल ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

Pakistan airstrike on Afghan border claims 16 lives; Kabul warns of retaliation

अफगानिस्तान के नांगरहार इलाके में पाकिस्तानी हमले के बाद आग की लपटें नजर आई। (सोर्स- X)

अफगानिस्तान, जीजेडी न्यूज। पाकिस्तान ने रविवार तड़के अफगानिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में हवाई हमले कर क्षेत्रीय तनाव को फिर भड़का दिया। इस्लामाबाद ने दावा किया कि कार्रवाई खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई और इसका निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) तथा इस्लामिक स्टेट से जुड़े सात ठिकाने थे। पाकिस्तान सरकार ने हालिया आत्मघाती हमलों के बाद इसे जवाबी कदम बताया और कहा कि हमलों की साजिश अफगान जमीन से रची जा रही थी। वहीं अफगान मीडिया और मानवाधिकार संगठनों ने नागरिक हताहतों का दावा किया है। काबुल ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए “सही समय पर कड़ा जवाब” देने की चेतावनी दी है। दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे अविश्वास और सीमा विवाद के बीच यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना सकता है।

नांगरहार में तबाही, नागरिक हताहतों का दावा
अफगान मीडिया के मुताबिक नांगरहार प्रांत में एक रिहायशी घर निशाना बना, जहां एक ही परिवार के कई सदस्य मलबे में दब गए। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने 16 मौतों का दावा किया है, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल बताए गए हैं। हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी स्पष्ट नहीं हैं।

पाकिस्तान का दावा: आतंकी ढांचे पर प्रहार
इस्लामाबाद ने कहा कि ऑपरेशन पूरी तरह इंटेलिजेंस आधारित था और लक्ष्य केवल आतंकी ठिकाने थे। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि टीटीपी के लड़ाके अफगानिस्तान से संचालित होते हैं। 2021 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से टीटीपी के हमलों में तेजी आई है।

दोहा समझौता और अंतरराष्ट्रीय दबाव
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 2020 के दोहा समझौता के प्रावधानों को लागू कराने की अपील की है। इस समझौते में तालिबान ने अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ न होने देने का वादा किया था। अमेरिका की वापसी के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण तेजी से बदले।

बढ़ता आतंकी खतरा और सीमा तनाव
हाल के महीनों में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आत्मघाती हमलों में वृद्धि हुई है। सीमा पर डूरंड लाइन को लेकर पुराना विवाद भी दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी बढ़ाता रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं हुए तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन सकता है।

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