सतकुंभा उत्सव 2026: आध्यात्मिकता, विज्ञान और लोककल्याण का अद्भुत संगम है सतकुंभा उत्सव
आध्यात्मिकता, विज्ञान और लोककल्याण का अद्भुत संगम है सतकुंभा उत्सव।
- सिद्धपीठ सतकुम्भा तीर्थ में रुद्र महायज्ञ लोककल्याण के लिए दी आहुति
सोनीपत, अजीत कुमार। सिद्धपीठ सतकुम्भा तीर्थ में आयोजित मुख्य रुद्र महायज्ञ के अवसर पर आध्यात्मिकता, विज्ञान और लोककल्याण का अद्भुत संगम देखने को मिला। विशाल यज्ञशाला में वेद मंत्रों की गूंज, आहुति की सुगंध और श्रद्धालुओं की आस्था ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया। इस अवसर पर पीठाधीश्वर राजेश स्वरुप महाराज ने कहा कि हवन और यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के संतुलन का वैज्ञानिक माध्यम हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि रुद्र महायज्ञ का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि रोग, विकार और दुखों से मुक्ति तथा वातावरण की शुद्धि है। यज्ञ से उत्पन्न औषधीय धूम्र वातावरण में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है। इससे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा का यह ज्ञान आज विश्व स्तर पर स्वीकार्यता प्राप्त कर रहा है।
पीठाधीश्वर राजेश स्वरुप जी ने बताया कि जर्मनी के म्यूनिख विश्वविद्यालय में हवन सामग्री के प्रभाव पर अध्ययन हुआ, जिसमें पाया गया कि समिधा के दहन से उत्पन्न गैसें जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक हैं। अमेरिका के ओहियो स्टेट विश्वविद्यालय में अग्निहोत्र पर शोध के दौरान वायु प्रदूषण में कमी के संकेत मिले। रूस में अग्निहोत्र की भस्म के परमाणु विकिरण पर प्रभाव को लेकर अध्ययन हुए, जबकि पोलैंड में यज्ञ कृषि पर प्रयोग कर फसलों की गुणवत्ता में वृद्धि देखी गई। फ्रांस में आम की लकड़ी के दहन से उत्पन्न तत्वों के जीवाणुनाशक गुणों पर शोध किया गया।
भारत में हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय और बेंगलुरु के एस-व्यासी संस्थान ने यज्ञ की वैज्ञानिकता, पर्यावरण शुद्धि और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर प्रमाणिक अध्ययन किए हैं। इन अध्ययनों में यज्ञ को चिकित्सीय प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में हरियाणा कला परिषद रोहतक की ओर से आए कलाकारों ने शिव स्तुति, गुरु वंदना और हरियाणवी संस्कृति पर आधारित भजन प्रस्तुत किए। सोमवीर सोनीपत प्राध्यापक, वीरेंद्र कुमार अध्यापक, मनोज गौड़ शास्त्री, बिलेंद्र जनेशर, ईश्वर यादव और जिंदा छौक्कर के साथ प्रबंधक सूरज शास्त्री ने कलाकारों को सतकुंभा की ओर से कलाकारों को सम्मानित किया गया। भक्ति रस से सराबोर इस वातावरण में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आहुति दी। बिलंदपुर के सरपंच महिपाल गौतम, वजीर कादियान बजानाकलां तथा लार्ड गणेश पब्लिक स्कूल, बीआर ग्लोबल स्कूल आदि विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों और अध्यापकों ने भी यज्ञ में सहभागिता की।
हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की सेवा की गई। समापन अवसर पर पीठाधीश्वर ने कहा कि जब समाज सामूहिक रूप से यज्ञ में सहभागी होता है, तब सकारात्मक ऊर्जा का व्यापक संचार होता है और विश्व कल्याण की भावना सुदृढ़ होती है। रुद्र महायज्ञ मानव, प्रकृति और परमात्मा के मध्य समन्वय स्थापित करने का सशक्त माध्यम है, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक है।
कैमरे की नजर में सतकुंभा उत्सव






