February 11, 2026

UGC के नए नियमों पर देशभर में बवाल: जनरल कैटेगरी के छात्रों का विरोध तेज, सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक गूंज

UGC's new rules spark nationwide uproar, with protests from general category students reaching the Supreme Court.

UP में सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजीं।

नई दिल्ली, अजीत कुमार। उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियम अब बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुके हैं। जनरल कैटेगरी के छात्र और सवर्ण समाज के लोग इन नियमों को अपने खिलाफ बताते हुए देशभर में सड़कों पर उतर आए हैं। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक प्रदर्शन, इस्तीफे, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका—UGC के ये नियम शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक संतुलन को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।

दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर कड़ा पहरा
नई दिल्ली में UGC हेडक्वार्टर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों को परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की गई है। आशंका है कि देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र संगठन और सामाजिक समूह राजधानी पहुंच सकते हैं।

यूपी में जगह-जगह प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज, सीतापुर और संभल समेत कई जिलों में छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किए। रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने विरोध स्वरूप सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजीं।

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा
विरोध के बीच बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए UGC नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसे आंदोलन की बड़ी नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया
कवि कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा,
“मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।”
यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई और बहस को और तेज कर गई।

UGC के नए नियमों का विरोध क्यों?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन्स रेगुलेशन्स, 2026’ नोटिफाई किए।
इनके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का प्रावधान है, जो मुख्य रूप से SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों पर काम करेंगी।

जनरल कैटेगरी का क्या कहना है
विरोध कर रहे छात्रों और संगठनों का आरोप है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों को “स्वाभाविक अपराधी” की तरह पेश करते हैं। उनका कहना है कि इससे कैंपस में डर और अराजकता का माहौल बनेगा और निष्पक्षता प्रभावित होगी।

नए नियमों में किए गए 3 बड़े बदलाव

  • 1. जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा
    अब जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान और विकलांगता के आधार पर होने वाले किसी भी पक्षपाती व्यवहार को भेदभाव माना गया है।
  • 2. OBC को भी दायरे में लाया गया
    SC/ST के साथ-साथ अब OBC छात्रों के खिलाफ भेदभाव भी नियमों के दायरे में होगा।
  • 3. झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटाया गया
    ड्राफ्ट में झूठी शिकायत पर दंड का प्रावधान था, जिसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया। यही बिंदु सबसे ज्यादा विवाद की वजह बना।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
एडवोकेट विनीत जिंदल ने UGC के नए नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। साथ ही रेगुलेशन 3(सी) पर रोक लगाने की मांग की गई है।

सरकार की सफाई
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नियमों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय या भेदभाव नहीं होगा।

इच्छा मृत्यु की चेतावनी
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नियम वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे।

संभल में काली पट्टी बांधकर विरोध
संभल में केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने काली पट्टी बांधकर बाइक रैली निकाली और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर नियम रद्द करने की मांग की।

दो आत्महत्याओं के बाद सख्त हुए नियम
रोहित वेमुला (2016) और डॉक्टर पायल तडवी (2019) की आत्महत्याओं के बाद जातीय भेदभाव के नियमों को सख्त करने की मांग उठी थी। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद UGC ने नए नियम तैयार कर जनवरी 2026 में लागू किए। UGC के नए नियम जहां जातीय भेदभाव रोकने की मंशा से लाए गए हैं, वहीं जनरल कैटेगरी के छात्रों में इन्हें लेकर गहरी आशंका और असंतोष है। अब यह मुद्दा सड़कों से निकलकर अदालत तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और न्यायपालिका का रुख यह तय करेगा कि यह विवाद किस दिशा में जाएगा।

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