गोकर्ण तीर्थ: आध्यात्म चेतना युवाओं को नई ऊर्जा देती है: बाबा कमलपुरी
सोनीपत: रक्तदाताओं का आशीर्वाद देमते हुए जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय सचिव बाबा कमलपुरी महाराज।
- गोकर्ण तीर्थ के पीठाधीश्वर व जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय सचिव बाबा कमलपुरी के सानिध्य में मनाई गई पुण्यतिथि
सोनीपत। ऐतिहासिक गोकर्ण तीर्थ के ब्रह्मलीन संत ओम स्वामी बाबा लक्ष्मण पुरी की 31वीं पुण्यतिथि सोमवार को गोहाना स्थित डेरा परिसर में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन गोकर्ण तीर्थ के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय सचिव बाबा कमलपुरी महाराज के सानिध्य में किया गया। महाराज श्री ने कहा कि आध्यात्म चेतना युवाओं को नई ऊर्जा देती है। पुण्यतिथि से पूर्व डेरा परिसर में भजन संध्या आयोजित हुई।

भजन संध्या के दौरान साध्वी पूर्णिमा के भजनों ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिली। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो गुरु की स्मृति और आशीर्वाद पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा हो। डेरा परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, सामाजिक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम और सेवा कार्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
पुण्यतिथि के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पीठाधीश्वर बाबा कमलपुरी महाराज ने कहा कि उनके ब्रह्मलीन गुरु का संत जीवन संत समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि भले ही गुरु आज भौतिक रूप में हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन सदैव संत समाज के साथ बना रहेगा। बाबा कमलपुरी महाराज ने यह भी कहा कि ब्रह्मलीन लक्ष्मण पुरी महाराज के सानिध्य में जूना अखाड़े में लिए गए अनेक निर्णय संत परंपरा को सुदृढ़ करने वाले सिद्ध हुए।

इस अवसर पर हरिद्वार से आए जूना अखाड़े के अनेक संत, रोहतक स्थित डेरा बाबा बालकपुरी धाम के महामंडलेश्वर बाबा करण पुरी महाराज, अन्नपूर्णा मंदिर के महामंडलेश्वर बलदेव राज शर्मा सहित अनेक संत उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और जिले के प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी ने संत समाज से आशीर्वाद प्राप्त कर भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
पुण्यतिथि के अवसर पर विशाल रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बाबा करण पुरी महाराज ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन संत परंपरा को आगे बढ़ाने और समाज में आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का माध्यम हैं, जो युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। रोहतक, गोहाना, सोनीपत, दिल्ली और हरिद्वार सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संत समाज और श्रद्धालु पहुंचे।
